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आंदोलनकारी या आंदोलनजीवि ??

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राष्ट्रवाद की भावना देश के हर नागरिक में होनी बहुत जरूरी है ।परंतु काफी बार ऐसा हो नही पाता है । जब देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के द्वारा देश हित मे लिए गए फैसलों का विरोध करती है तो हमेशा अपने आप को वो देश विरोधी ताकतों के साथ खड़ा करके रख देती है ।  देश के किसानों के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाए गए नए कानूनो से जहाँ एक बड़ा किसानों का तबका खुश है वही कुछ आंदोलन की मंशा और कुछ को उकसा कर इस बार फिर कांग्रेस और पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी अकाली दल ने अपने आप को फिर से आंदोलनकारी की जगह खालिस्तानी समर्थित आंदोलन में खड़ा कर दिया है ।  मोदी जी ने राज्यसभा और लोकसभा में इन देश विरोधी और देश के विकास में बाध्य आंदोलनकारी को आंदोलन जीवि करार दिया है । उनका सुबह उठने से लेकर सोने तक बस एक ही काम है ,देश का विकास न होने देना । देश के गरीब मजदूर वर्ग किसान वर्ग आदिवासी वर्ग अन्य पिछड़े वर्गों का सर्वांगीण विकास न हो सके ।  नए कानून बनने के बाद क्या किसी भी किसान के पुराने हक को छीन लिया गया है? सब कुछ वैसा ही है। एक अतिरिक्त विकल्प की व्यवस्थ...

तांडव तो अब होगा

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  साल 2021 की शुरुआत कुछ खालिस्तानी मुद्दों के साथ साथ एक OTT प्लेटफॉर्म के अमेज़ॉन पर आई वेब सीरीज के बवाल के साथ शुरू हुआ । एक मुस्लिम फ़िल्म निर्माता अली अब्बास जफर की सैफ अली खान और टुकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य ज़ीशान अय्यूब के साथ बनी तांडव वेब सीरीज ने इतना बवाल मचाया की सबको एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ी । तांडव वेब सीरीज सिर्फ हिन्दू धर्म की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है । इस सीरीज में भगवान श्री राम जी और शिव जी के बीच में अत्याधुनिक तरीके से वाद विवाद बताया गया और उसमें ऐसा दिखाया गया कि जैसे भगवान श्री राम जी की फैन फॉलोइंग भगवान शिव जी से ज्यादा बढ़ रही है इसलिए इसकी आड़ में देश को जाति सिस्टम में बांटने वाले नारे लगाकर इस मुद्दे को और हवा दी गई । इनको मनुवाद से इनको ब्राह्मण वाद से इनको सामंतवाद से आजादी चाहिए ऐसे भड़काऊ नारे भी लगे थे । और जिस महाविद्यालय का इस सीरीज में जिक्र हुआ है उसका नाम भी विवेकानन्द नेशनल यूनिवर्सिटी रखा । जिससे सबसे बड़े हिन्दू धर्म के लिए अपमानित होने जैसा माहौल बनाया जा सके । कुछ और भी विवादस्पद दृश्य इस सीरीज में फिल्माए गए । जिसका इस जग चुके हिन...

पेट्रोल पर हाय तौबा :- कांग्रेस का दुगुना टैक्स

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पेट्रोल और डीजल अब हर इंसान के जिंदगी के अहम हिस्से है । जब मोदी सरकार 2014 में केंद्र पर काबिज हुई थी तो दाम 72 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और 58 रुपए प्रति लीटर डीजल था। धीरे धीरे दाम बढे मोदी सरकार ने केंद्र का वेट कम किया फिर लॉक डाउन में केंद्र सरकार ने भी टैक्स बढ़ाकर जनता के लिए थोड़ी मुसीबत भविष्य के लिए खड़ी कर दी थी । भारत में 71% टैक्स, दुनिया में सबसे ज्यादा पंप मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर कुल 71 फीसदी टैक्स लगता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत के अलावा सिर्फ फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में ही ईंधन पर टैक्स 60 फीसदी से ज्यादा है। पिछले साल तक भारत में भी डीजल और पेट्रोल पर टैक्स 50 फीसदी तक था। कोरोना वायरस और लॉकडाउन से उत्पन्न आर्थिक संकट के बीच आम आदमी की परेशानी बढ़ती जा रही है। जनता काे अब पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से भी जूझना पड़ रहा है।  पर इन सबसे परे सबसे बड़ी देखने वाली बात ये थी कि जिस पेट्रोल पर केंद्र सरकार ने ववैट बढ़ाया उससे कही ज्यादा कांग्रेस या भाजपा विरोधी राज्य सरकार ने फायदा उठाते हुए उनसे दुगुना कर लेने लगे ।  आज भाजपा...

कृषि विधेयक 2020 : मोदी का किसान हितकारी बिल

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आजादी के बाद हिंदुस्तान के कृषि विभाग में बड़ा बदलाव हो गया है, सरकार तीन कृषि विधेयकों को कृषि के सुधार में अहम कदम बता रही है तो किसान संगठन जिसमे से आधे से ज्यादा कांग्रेस प्रेरित और खालिस्तान समर्थक संगठन जुड़ गए वो और विपक्ष इसके खिलाफ हैं। सड़क और सोशल मीडिया में किसान कम कांग्रेस वामपंथियों ने किसानों की आवाज दबाकर खुद की आवाज़ बुलंद किए हैं वही बिल पास होने के विरोध में एनडीए सरकार की सहयोगी पार्टी रही अकाली दल की नेता और केंद्रीय खाद्य संस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अपने जन्मदिन पर हिंदुस्तान के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी ने कहा था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद जारी रहेगी, कुछ शक्तियां किसानों को भ्रमित करने में लगी हैं लेकिन इसे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। साल 2022 तक किसानों की आमदनी बढ़ाने का वादा करने वाली केंद्र सरकार के इन विधेयकों का विरोध क्यों हो रहा है। क्यों किसानों को लग रहा है सरकार उनकी मंडियों को छीनकर कॉरपोरेट कंपनियों को देना चाहती है? क्यों किसानों को लगता है सरकार का ये कदम किस...

शाहीन बाग़ -2 ( खालिस्तानी दिल्ली में )

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  # किसान आंदोलन तो                   बहाना   है   दिल्ली   में   शाहीन   बाग़ -2  बनाना है  ...! किसान आंदोलन के नाम पर कई ऐसे संगठन   और   लोग   जुड़   रहे   है   जो नागरिकता   संसोधन   कानून   के   खिलाफ   देश   विरोधी   आंदोलन को हवा दे चुके हैं और जिसका कांग्रेस पार्टी   और   आम   आदमी   पार्टी ने समर्थन किया था ।   पीपुल मूवमेंट नाम की संस्था भी आंदोलन का हिस्सा है जिसमे उमर खालिद भी सदस्य है जो दिल्ली दंगे के आरोप में जेल में बंद है और यूनिटी अगेंस्ट हेट नामक संस्था जो  CAA  आंदोलन में भड़का रही थी वह भी शामिल   है। ना किसी की जमीन जा रही, ना कोई मंडी खत्म हो रही फिर भी  CAA  की तरह भड़काया जा रहा है कि किसानों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे। यह आंदोलन बिहार चुनाव की हार का एक खीझ है जिसमें खालिस्तानी, टुकड़े गैंग, नक्सली, बाम पंथी, तथाकथित पत्रकार, बुद्धजीवी जो  CAA  आंदोलन...

26/11 और कांग्रेस की हिन्दू आतंकवाद की थियोरी

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  जब देश में यूपीए सरकार का शासन था तब मनमोहन सरकार में हर दिन के समाचार में सुनने और देखने को मिलता था कि आज यहाँ धमाका हुआ है आज वहाँ गोली चली । 26 नंवबर 2008 का मुम्बई में जब पाकिस्तान में स्थित एक इस्लामिक आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 सदस्यों ने मुंबई में बम विस्फोट और गोली बारी करके 155 से ज्यादा मासूम हिंदुस्तानी और विदेशी लोगो को मौत के घाट उतार दिया। कई बुरी तरह से जख्मी हुए थे।इसी हमले में कई वीर सैनिकों और सशस्त्र बलों के योद्धाओं को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी परन्तु  “ कांग्रेस का हाथ , जेहादियों के साथ ” । ये बात हम सब बहुत बार ,बार बार सुनते पढ़ते रहे हैं और इन चार शब्दों से अपने गंदे सच को बाहर आता देख कांग्रेस बुरी तरह बौखला कर बिलबिलाती है। मगर यही वो लोग हैं जिन्होंने 26/11 को पाकिस्तानी इस्लामिक और मुस्लिम आतंकयों द्वारा मुंबई में आतंकी हमला करके सैकड़ों लोगों को मार देने का षड्यंत्र रचने का सारा दोष हिन्दुओं पर ही मढ़ दिया था।   दिग्विजय सिंह , सुशील कुमार शिंदे जैसे कांग्रेस के नेताओ ने तो इस धारणा को और...